विवादित जगह पर राम मंदिर निर्माण के पक्ष में आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इस फैसले के बाद विश्व के सबसे लंबे मुकदमें का पटाक्षेप हो गया। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों ने एकमत से फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन पर राम मंदिर बनाने और मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में 5 एकड़ जमीन मस्जित निर्माण के देने राज्य और केन्द्र सरकार को निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि विवादित मस्जिद में नमाज़ पढ़ी जाती थी साथ ही यह भी माना कि वहां पर श्रीराम का जन्म हुआ था। बीती रात नौ बजे के आसपास यह खबर आई कि 9 नवंबर को अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। इसके बाद से ही अटकलों बाजार गर्म हो गया और कयास भी लगाए जाने लगे। लेकिन इसके पहले केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को एलर्ट पर रखा और उत्तर प्रदेश विशेष एलर्ट पर था अयोध्या में चाकचौबंद व्यवस्था थी। फैसले के बाद किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बल चौकस थे। साथ केन्द्र सरकार ने सभी जिम्मेदार लोगों मीडिया और सोशल मीडिया पर किसी भी तरह के जश्न या भड़काने वाले बयान या पोस्ट लिखने से बचने के लिए संदेश प्रसारित किया था।

9 नवंबर की तारीख इस मामले में बेहद अहम है। 9 नवंबर 1989 को भाजपा के कई नेताओं की अगुवाई में राम मंदिर शिलान्यास का अयोध्या में विवादित जगह पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। और अब सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राम मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया है। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वफ्फ बोर्ड विवादित जगह पर अपना दावा पेश करने में असफल रहा वहीं अपने फैसले में मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में 5 एकड़ जमीन और मंदिर निर्माण के लिए केन्द्र सरकार को ट्रस्ट बनाने का निर्देश देते हुए इसे तीन माह के भीतर बना लेने के निर्देश दिए।

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