लोकसभा चुनाव 2019 के सभी 7 चरणों के मतदान समाप्त हो चुके हैं। 23 मई को मतगणना होगी जिस पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं। देश भर में मतदान का प्रतिशत बढ़ा है और सत्ताधारी दल इसे अपने लिए अच्छा संदेश मानते हुए जीत के दावे कर रही है। वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भी जीत के दावे कर रही है। एकतरफ कांग्रेस रहित महागठबंधन भी अपनी जीत के दावे कर रही है। इन्हीं दावों ने देश के आम लोगों का कौतूहल बढ़ा दिया है। जहां तक मतदान का सवाल है बंगाल को छोड़ दें तो देश भर में शांतिपूर्ण हुए हैं।

इन सबके बीच दावों की हकीकत पर नज़र डालें तो सभी विपक्षी दल मोदी के हारने का दावा कर रहें हैं। विपक्षी दलों का दावा है कि 23 मई के बाद देश में नया प्रधानमंत्री होगा जो उनके महागठबंधन का होगा। दूसरी तरफ कांग्रेस का दावा है राहुल गांधी प्रधानमंत्री होंगे। महागठबंधन के नाम सभी विपक्षी दलों के एक होने की तस्वीरें चुनाव से पहले सामने आयी थी लेकिन चुनाव के आते आते बसपा और सपा देश के सबसे बड़े सूबे में गठबंधन कर सके इस प्रदेश में कांग्रेस गठबंधन से अलग है। वहीं पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं हो सका। बिहार और दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस ने क्षेत्रीय दलों से गठबंधन किया है। एक तरह से देखें तो महागठबंधन अव्यवस्थित नज़र आ रहा है। वहीं बीजेपी और सहयोगियों ने एनडीए का गठबंधन कायम है कुछ दल इस गठबंधन से अलग हुए तो कुछ जुडे भी हैं।

भाजपा का दावा है कि लोकसभा 2019 में सत्तापक्ष के लिए अंदरूनी लहर चल रही है। वैसे देश का चुनाव एक तरह से मोदी विरूद्ध विपक्ष नज़र आ रहा है। कांग्रेस के बाद पहली बार किसी गैर कांग्रेसी दल के प्रधानमंत्री का नाम केन्द्र में हैं। सातवें चरण के आते आते तस्वीरें साफ हो रहीं हैं अब कांग्रेस भी यह कहने लगी है कि मतगणना के बाद विपक्षी दल अपना प्रधानमंत्री का फैसला करेंगे। यानि कांग्रेस अब राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनाए जाने के लिए नहीं कह रही है। क्या कांग्रेस को इस बात का अंदाजा हो गया है कि वे पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में नहीं आ रहें है? वहीं अन्य विपक्षी दलों में से भी ऐसी ही प्रतिक्रियाएं सामने आ रहीं हैं। लेकिन प्रधानमंत्री के नाम पर सभी ने चुप्पी साधी हुई है। इसका फायदा भाजपा को हो रहा है। जिसने अपना प्रधानमंत्री पद दावेदार नरेन्द्र मोदी को पहले ही चुन लिया है। नरेन्द्र मोदी पूर्ण बहुमत की सरकार देश के लिए कितना जरूरी यह जनता को बताने में सफल रहें हैं। उनके सामरिक फैसलों और विश्व के देशों के बीच संबंध ने उनका कद बढ़ाया है। जहांतक भाजपा के एक बार फिर सत्ता में आने का सवाल है। इसकी पूरी संभावना नज़र आ रही है। भाजपा की सीटों की संख्या 3 से 5 प्रतिशत का इज़ाफा हो सकता है। वहीं कांग्रेस की वर्तमान सीटों की अपेक्षा 50 से 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना नज़र आ रही है। यह एक अनुमान मात्र है इसकी सच्चाई 23 मई को सामने आयेगी।

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