कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर जैसे नेता इन दिनों मीडिया की सुर्खियां बटोर रहें हैं यह मौका उन्हें सत्ता में नहीं होने की वजह से मिल रहा है। पाकिस्तान और कांग्रेस के बीच संबंधों को मजबूत करने की जवाबदारी उन्हें मिली हुई है ऐसा लग रहा है। जो झूठ भारत की जनता को उन्होंने परोसा है वही झूठ वे पाकिस्तान में जाकर परोस रहें हैं। पिछली बार वे पाकिस्तान को मोदी को हटाने की जिम्मेदारी देकर आये थे। इस बार उन्होंने जो कहा उसके पहले एक बार फिर नहीं सोचा और कह गए। पाकिस्तान में जाकर भारत के खिलाफ झूठा प्रचार करना कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की जिम्मेदारियों में से एक है जिसे वे बखूबी निभा रहें है। पाकिस्तान के लाहौर में एक कार्यक्रम के निमंत्रण पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से मधुर संबंध जब तक नहीं होंगे भारत धर्म निरपेक्ष देश नहीं बन सकता।

यदि उनकी इस बात को गौर करें तो भारत कभी भी धर्म निरपेक्ष देश नहीं रहा। अब जब 1947 में धर्म के आधार पर यह विशाल राष्ट्र बंट गया हो तो आपको हिंदुस्तान को धर्म निरपेक्ष बनाने की क्यों आवश्कता पड़ रही है। और इस देश में सबसे ज्यादा शासन किसी अकेली पार्टी ने किया है तो वह कांग्रेस पार्टी है। पड़ोसी देश के साथ तो कांग्रेस पार्टी के शासन के दौरान सबसे ज्यादा लड़ाईयां हुई। अय्यर जी आप ही की पार्टी ने पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में जीती जमीनें लौटा दी जिसकी वजह से देश को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

आपने जो पाकिस्तान में जाकर कहा है उसे अपनी पार्टी के भीतर कहने की भी हिम्मत दिखाएं तो अच्छा होगा। क्या ये मान लें कि कांग्रेस के शासन में भी पाकिस्तान से संबंध कभी अच्छे नहीं रहें हैं। पहले धर्म के आधार पर देश के फिर पाकिस्तान के टुकड़े भी कांग्रेस के शासनकाल में हुए। यदि पाकिस्तान को आप और आपको पाकिस्तान इतना प्रिय है तो वहां की नागरिकता लेकर वहीं बस जाएं फिर इस बात को समझने का प्रयास करें की सीएबी क्यों जरूरी है।

एक बार वे कह चुके हैं कि उन्हें भारत से ज्यादा प्यार पाकिस्तान में मिलता है। और वहां के लोगों पर ज्यादा भरोसा है। नागरिकता कानून संशोधन जिसका गलत प्रचार अय्यर पाकिस्तान जा कर कर रहें हैं उस कानून को लागू करने का कारण, पाकिस्तान के बनने के साथ ही सामने आ चुका था। शुरूआती तौर पर बड़े मामले का जिक्र करें तो शायद समक्ष आ जाए। पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री के बारे में तो शायद पता ही होगा जो हिंदू थे और जिनका नाम योगेन्द्र नाथ मंडल था वे पश्चिम बंगाल से थे, उन्हें जिन्ना अपने साथ पाकिस्तान ले गए। मंडल ने पाकिस्तान का संविधान लिखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

उनके साथ क्या हुआ। पाकिस्तान में हिंदुओं की कम हो रही संख्या के संबंध में जानकारी चाहने पर उनके साथ क्या हुआ? पाकिस्तान बनने के तीन साल के बाद ही उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। जिन्ना की मौत के बाद उन्हें पाकिस्तान छोड़कर चले जाने का फरमान मिला और वे वापस भारत आ गए। ये तो ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें ऐसी बेइज्जती झेलनी पड़ेगी सोचा भी नहीं जा सकता था। आम हिंदू जो पाकिस्तान के नागरिक थे उनकी तो बात ही छोड़ दो। ऐसे कई उदाहरण है इसके अलावा एक राज्य मंत्री जो राजस्थान से थे उनके साथ भी ऐसा ही हुआ था। यह तो इतिहास रहा पाकिस्तान के बनने के बाद, इसे समझना जरूरी है लेकिन विपक्ष समझकर भी नहीं समझना चाहता क्योंकि इसके पीछे की राजनीति उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रही है।

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