इन दिनों राजनैतिक गलियारे मे सबसे ज्यादा चर्चित मुद्दा है वह है नागरिकता संशोधन बिल यानि सीएबी। सीएए आखिर है क्या है? कुछ राजनैतिक दल इसका विरोध क्यों कर रहें हैं और आखिर बाहर से आने वाले मुस्लिमों को इस बिल में जगह क्यों नहीं मिली।

क्या है नागरिकता संशोधन बिल ? भारत की सीमा से लगे तीन देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले वे अल्पसंख्यक जिन्हें धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किया गया हो और वे भारत में शरण लिए हों ऐसे लोगों को भारत की नागरिकता मिलेगी। इनमें मुस्लिम धर्म को मानने वालों को छोड़कर भारत में मौजूद लगभग सभी धर्म शामिल हैं।

संसद के दोनो सदनों में इस बिल को बीजेपी ने पास करवा लिया । आपको बतादें बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में इसका उल्लेख किया था। कांग्रेस लेफ्ट और उसके सहयोगी दल इसका विरोध कर रहें हैं। इसपर बहस भी हुई और कई सवाल भी उठाए गए। जैसे कांग्रेस के सदस्य ने पूछा अफगानिस्ता कहां भारतीय सीमा से लगती है। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर पीओके को भारत का हिस्सा नहीं मानने पर कांग्रेस को घेरा और बताया कि 106 किमी के लगभग अफगानिस्तान की सीमा पीओके से मिलती है और पीओके भारत का हिस्सा है ऐसा वे मानते हैं।

आखिर तीन देशों से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को इस बिल के जरिए नागरिकता देने का प्रावधान क्यों किया गया और मुस्लिमों को इससे क्यों अलग रखा गया है। दरअसल ये तीनों ही देश इस्लामिक रिपब्लिकन है यानि धर्म के आधार पर ये देश इस्लामिक हैं। यहां पर हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौध और पारसी अल्पसंख्यक हैं जिन्हें धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जाता रहा है इसके कई मामले सामने आये हैं। साथ ही ये देश मुस्लिम देश हैं जहां मुस्लिमों को धर्म के आधार पर प्रताड़ना का प्रश्न ही नहीं उठता इसलिए इन देशों से आने वाले मुस्लिमों को भारत की नागरिकता नहीं दी जा सकती।

इसके अलावा गृहमंत्री ने साफ किया कि भारत के मुस्लिमों को इस बिल की वजह से चिंता करने की जरूरत नहीं है। यह बिल नागरिकता देने का बिल है। कांग्रेस और उनकी सहयोगी पार्टियों की सरकार वाले राज्यों में इस कानून को लागू नहीं करने की बात कही गई है। जिसमें छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश राजस्थान केरल और पंजाब शामिल हैं इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इसे लागू नहीं करने की बात कही है।

वजह साफ है इन पार्टियों के केन्द्रीय नेतृत्व इस बिल का विरोध कर रहें हैं तो ये पार्टियां अपने शासित राज्यों में इसे क्यों लागू करेंगी। दरअसल नागरिकता के प्रश्न पर भी राजनीति की जा रही है यह साफ नज़र आ रहा है। विरोध करने वाली पार्टियों ने इन देशों से आने वाले अल्पसंख्यकों को नागरिकता दिये जाने का स्वागत नहीं किया बल्कि मुस्लिमों को नागरिकता क्यों नहीं मिल रही है, इस बात पर ही शोर मचा रहें हैं, जबकि पूरे विश्व में 53 मुस्लिम देश हैं जहां मुस्लिमों को धर्म के आधार पर नागरिकता दी जा सकती है।

यही नहीं पाकिस्तान को भी इस बिल के कानून बन जाने से परेशानी हो रही है जबकि यह हमारे देश का मामला है और किसी भी देश को यह अधिकार है कि वह किसे नागरिकता दे या न दे।

:- मनु वार्ता

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here