छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार का यह मौका बड़ा ही छत्तीसगढ़िया रहा। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं छत्तीसगढ़ी संस्कृति को प्रमोट करने प्रथम पंक्ति में खड़े दिखाई दिए, यह उनका कर्तव्य भी है जिसका उन्होंने बखूबी पालन किया। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल उन्होंने खेला, हालांकि वर्षों पहले उन्होंने इस खेल को खेला होगा, लेकिन ऐसा नहीं लगा कि काफी दिनों बाद उन्होंने “भौंरा” खेला और “गेड़ी” पर भी सवारी की। छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रसार के लिए यह अच्छा संकेत है। यह पहला मौका है जब किसी मुख्यमंत्री ने गेड़ी की सवारी की। इसके पूर्व डॉ. रमन सिंह थे लेकिन अपने कार्यकाल में “गेड़ी” पर सवार नहीं हुए बल्कि उन्होंने बचपन में “गेड़ी” की सवारी की थी। इस लिहाज से भूपेश बघेल उनसे आगे जरूर निकल गए हैं। वैसे छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बचाने के लिए उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी योजना “नरवा घुरूआ बारी” की शुरूआत भी कर दी। प्रदेश के विकास के लिए उन्होंने जनहित से जुड़ी कई योजनाओं की सौगात जनता को दी है। यही नहीं किसानों को किया वायदा भी वे पूरा कर रहें हैं। उनके जनहित से जुड़ फैसले जनता के लिए फायदेमंद साबित हो रहें हैं इसके लिए उनकी प्रशंसा भी सुनने को मिल रही है। अभी उन्हें प्रदेश के विकास के लिए लंबे कदमों से चलना होगा इसके लिए वे प्रदेश के पारंपरिक खेल “गेड़ी” पर सवार होते हैं तो निश्चित ही प्रदेश के विकास में उनके लंबे कदम मील का पत्थर साबित होंगे.

:- मनीष शर्मा

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