रायगढ़: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2022 तक देश में सभी को छत मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है. लेकिन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में लाभार्थी इस योजना का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं. सरकार मकान बनाने के लिए गरीबों के खाते में पैसे डाल रही है, लेकिन वो उस पैसे को लेकर अन्य चीजों में खर्च कर रहे हैं. किसी ने उस पैसे से बाइक खरीद ली तो कोई टीवी, फ्रिज और कूलर खरीदकर ले आया.

बता दें कि मकान के नाम पर कहीं पत्थरों का टीला है तो कहीं झोपड़ियां खड़ी हैं. परेशान जिला पंचायत ने ऐसे लोगों से राशि वसूलने के लिए एसडीएम को नोटिस जारी करने को कहा है. रायगढ़ जिले के सभी 9 जनपदों में ऐसे 792 लोग हैं, जिन्हें पहली किस्त की राशि 3 करोड़ 80 लाख रुपए जारी करने के बाद भी मकान नहीं बना है. मालूम हो कि जिला पंचायत की ओर से पीएम आवास योजना के तहत ग्रामीणों को 3 किस्तों में राशि जारी की जाती है, जो सीधा उनके खाते में डाली जाती है. मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2011 सर्वे की लिस्ट में नाम शामिल होने पर पहली किस्त की राशि 48 हजार रुपए घर का निर्माण करने के लिए दिया जाता है. इसके बाद दूसरी किस्त के तहत 48 हजार फिर दी जाती है. आखिरी और तीसरी किस्त के रूप में 24 हजार रुपए दिए जाते हैं. वहीं घर का निर्माण पूरा होने पर मनरेगा से मजदूरी के लिए 15 हजार रुपए दिए जाते हैं.

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