कहते हैं कि हम जैसे लोगों के साथ रहते हैं वैसा ही हमारा व्यवहार बनने लगता है। जहां अब बच्चों में अनुशासन की बेहद कमी होने लगी है, वहीं आपके बच्चे को लाइफ के प्रति एक बेहतर नजरिया देने के लिए पेट पैरंट बनना काफी हेल्पफुल हो सकता है। बहुत सी चीजें जो हम अपने बच्चे को सिखाना चाहते हैं, वह आपका पेट उसे सिखा देता है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं, कैसे आपका पेट पैरंट बनना, आपके बच्चे को जिम्मेदार, सामाजिक और ऐक्टिव बना सकता है।
आजकल के समय में बच्चों में अनुशासन की बेहद कमी है। समाज में बदलाव के साथ बच्चों के व्यवहार में काफी फर्क आया है। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा जिद्दी बन रहा है, समय से काम नहीं कर रहा या उसे लोगों से घुलने-मिलने में दिक्कत होती है, तो आपको पेट पैरंट बनने की जरूरत है…
पेट पैरंट बनने पर घर के बच्चों पर पडऩे वाले असर के बारे में पेट एक्सपर्ट स्वाति टंडन बताती हैं, ‘बच्चों के लिए घर पर पेट रहना बेहद जरूरी है, खासतौर पर सिंगल बच्चों के लिए जो पेट के साथ बड़े होते हैं, उनकी इम्यूनिटी नॉर्मल बच्चों से ज्यादा होती है। आजकल हर कोई बच्चे के लिए ही काम कर रहा है, लेकिन बच्चे पर कोई जिम्मेदारी नहीं देता। ऐसे में एक वक्त के बाद वह सेल्फफिश होने लगते हैं। अगर आप इस इको सिस्टम में पेट्स को शामिल कर देते हैं, तो बच्चा जिम्मेदारी सीखता है।
आपने देखा होगा कि कई बच्चे जानवरों को खेल-खेल में उन्हें मारने लगते हैं। ऐसे में बड़े होने पर भी उनका जानवरों के प्रति व्यवहार आक्रामक बना रहता है। सबसे जरूरी है बच्चे का व्यवहार हर जानवर के लिए अच्छा हो और वह प्रकृति की बनाई हर चीज को प्यार करे। ऐसे में अगर आपका बच्चा छोटा है, तो आपको एक पेट जरूर पालना चाहिए।
समय का समझेगा महत्व
अगर आपका बच्चा डॉग पालने की जिद करता है, तो आप डॉग जरूर अडॉप्ट करें। ऐसे में आप अपने बच्चे से डॉग के रुटीन के कामों को करने के लिए कह सकते हैं। जैसे कि रोज उसे समय पर खाना देना, उसे नहलाने में हेल्प करना, उसके सोने और बैठने की जगह को साफ रखना। इससे आपका बच्चा समय की कीमत समझेगा। साथ ही उसको इस बात का अहसास होगा कि उसकी कोई जिम्मेदारी भी है और उसे वह पूरी करनी है। ये ही आदत उसे जिम्मेदार इंसान बनाएगी। इसके साथ ही उसमें साफ-सुथरा रहने की प्रवृति भी पनपेगी।
टेंशन होगी कम, रहेगा ऐक्टिव
शौक-शौक में अक्सर बच्चे पालतू जानवरों के साथ बाहर निकल जाते हैं, जिसके बाद वह उनके साथ खूब खेलते हैं। इस दौरान वह दौड़ते भी हैं और उछल-कूद भी करते हैं। इसका बच्चे पर गहरा असर पड़ता है। स्कूल से आने के बाद बच्चे की थकान दूर हो जाती है और वह होमवर्क की टेंशन को भूल जाता है, उसका ब्लड प्रेशर भी नॉर्मल रहता है। इससे बच्चे की एक्सर्साइज और खेलकूद में भी रुचि बढ़ती है, जो उसके फ्यूचर के लिए बेहद जरूरी होती है।
व्यवहार बनता है सामाजिक और नैतिक
पेट चाहे डॉग हो या कैट, उनका साथ बच्चे को गुस्से में नियंत्रण करना, सामाजिक कौशल और आत्मसम्मान को अच्छा करने में मदद करता है। इससे बच्चों को अन्य लोगों से जुडऩे में भी मदद मिलती है। बच्चे किसी भी काम करते समय हिचकते नहीं है और निडर होकर उसे करते हैं। परिवार में डॉगी के होने से भाई-बहनों में प्यार बढ़ता है और वह एक-दूसरे का ख्याल रखना भी सीख जाते हैं। डॉगी के रहने से घर में चहल-पहल बनी रहती है, जिससे घर का माहौल खुशनुमा बना रहता है। इसके साथ ही वह हर किसी का सम्मान करने लगता है।
सिंगल बेबी को मिलता है साथ
आजकल लोग हम दो हमारा एक के विचार पर चलने का संकल्प लेते हैं। यह एक तरीके से अच्छी बात है, लेकिन इसका एक दूसरा पहलू यह भी हो सकता है कि आपका बच्चा अकेलापन महसूस करे। ऐसे में बच्चे दूसरे के बहन-भाइयों को देखकर उनकी कमी महसूस करने लगते हैं। अगर आप पेट पैरंट बनते हैं, तो आपके बच्चे का अकेलापन दूर होगा साथ ही उसका मन भी लगा रहेगा।

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