नई दिल्ली: इंटरनैशनल हॉकी फेडरेशन (एफआईएच) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थिएरी वेल ने कहा है कि 2023 में होने वाले पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप की मेजबानी का अधिकार भारत को योग्यता के आधार पर दिया गया है। यह लगातार दूसरी बार है जब भारत इस प्रतिष्ठित टूर्नमेंट की मेजबानी करेगा। वेल ने कहा कि भारत जैसे देश में खेल की वित्तीय व्यावहारिकता पर विचार करने के बाद मलयेशिया की जगह उसे प्राथमिकता दी गई। उन्होंने लुसाने से टेलीकॉन्फ्रेंस के जरिए भारतीय पत्रकारों से बातचीत की।

उन्होंने कहा, ‘मेरा ताल्लुक किसी अन्य खेल फुटबॉल से है, जहां जब भी हम वर्ल्ड कप का आयोजन करते हैं, तो हम सभी की बेवजह खर्च करने के लिए बहुत आलोचना की जाती है। ऐसे में मैं इस बात को लेकर खुश हूं कि हमने भुवनेश्वर जैसे स्थल को दूसरी बार इस्तेमाल करने का फैसला किया है। उस स्थल के निर्माण के लिए काफी मेहनत और निवेश हुआ है। मेरे विचार से हमारे पास फिलहाल जितने भी स्थल हैं, वह सर्वश्रेष्ठ हैं।’
भारत इस तरह से चार बार विश्व कप (पुरुष) की मेजबानी करने वाला पहला देश बनेगा। भारत ने इससे पहले 1982 (मुंबई), 2010 (दिल्ली) और 2018 (भुवनेश्वर) में इस टूर्नमेंट की मेजाबानी की है। नीदरलैंड ने भी तीन बार इसकी मेजबानी की है।

वेल ने कहा, ‘मेजबानी की बोली एक खुली प्रक्रिया के तहत थी। मलयेशिया सहित अन्य देशों से भी काफी अच्छी बोली मिली। भारत को मेजबानी देने का फैसला वाणिज्यिक प्रासंगिकता और उच्च वित्तीय योगदान को ध्यान में रखते हुए तय किया गया था। एफआईएच को राजस्व की आवश्यकता है। भारत ने अपनी बोली में सभी चीजों को अच्छे से शामिल किया था। ईमानदारी से कहूं तो इस खेल में भारत जैसा देश होने से बहुत फर्क पड़ता है क्योंकि देश के आकार और जनसंख्या के साथ यहां हाकी प्रेमियों की बड़ी संख्या है।’

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