रायपुर: देश एवं प्रदेश में रेशम उत्पादन के जरिए महिला सशक्तिकरण एवं आर्थिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाने की ओर किए जा रहे सक्रिय प्रयासों के चलते 2018-19 में देश में 35261 मीट्रिक टन से भी अधिक रेशम उत्पादन किया जा रहा है। विश्व के अनेक देशों में रेशम से बने वस्त्रों की अच्छी मांग है। रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय रेशम उद्योग मंत्रालय द्वारा 600 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। उक्ताशय की जानकारी उच्च विश्राम गृह में आयोजित पत्रकारवार्ता में केन्द्रीय रेशम बोर्ड बैंगलुरू के अध्यक्ष के.एम. हनुमन्थरायप्पा ने दी।
पत्रकारवार्ता में हनुमन्थरायप्पा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में टसर रेशम 3000 मीट्रिक टन होता है।
छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, झारखंड, ओडिशा आदि में महिलाओं द्वारा रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अथक परिश्रम कर आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में सशक्तिकरण जारी है। उन्होंने बताया कि वे 2 जुलाई से 6 जुलाई के मध्य छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। इस अवधि में वे केन्द्रीय रेशम बोर्ड की ईकाइयों तथा निजी रेशमउत्पादक उद्यमियों के साथ अलग-अलग बैठकें कर रेशम उत्पादन के क्षेत्र में वृद्धि किए जाने के संबंध में चर्चा कर रहे हैं साथ ही रेशम कीट पालकों, रेलरों और बुनकरों से चर्चा कर पायलट प्रोजेक्ट केन्द्रों, प्राईवेट गे्रनुअर्स और निजी शुल्क मिलों का दौरा कर आवश्यक जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश में रेशम उत्पादन 2015-16 के मुकाबले 28, 525 मीट्रिक टन की तुलना में बढक़र 23, 61 प्रतिशत की वृद्धि की। कच्चा रेशम उत्पादन के क्षेत्र में वर्ष 2015-16 में 4, 615 मीट्रिक टन की तुलना में 2018-19 में 49.75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ में गत तीन सालों में कच्चा रेशम उत्पादन 408.66 मीट्रिक टन हुआ है। रोजगार के क्षेत्र में भी 2015-16 के मुकाबले 2018-19 में 10.54 प्रतिशत की वृद्धि महिलाओं के अथम परिश्रम के कारण हुई है। पत्रकारवार्ता में हनुमन्थरायप्पा ने बताया कि कच्चे रेशम के कोकुन के प्रतिदिन के बाजार भाव जानने के लिए किसानों के लिए एसएमएस सेवा की शुरूआत की गई है। साथ ही पोर्टल के माध्यम से सेरीकल्चर इंफॉर्मेशन लिंकेज एंड नॉलेज सिस्टम के जरिए संभावित क्षेत्रों में मैपिंग को विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि थाई रीलिंग के पूर्ण उन्मूलन के लिए बुनियाद में छत्तीसगढ़ सहित रेशम उत्पादक राज्यों में 4500 रीलिंग मशीनों को लांच कर वितरित किया गया है। 2020 तक शेष मशीन के 5 हजार सैट प्रदाय किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। मैसुर की तर्ज में अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज यूनिट बिलासपुर में 1.30 करोड़ डीएफएल (बीज) को रखने की यूनिट स्थापित की गई है। पत्रकारवार्ता में वरिष्ठ अधिकारियों ने डॉ. सिन्हा, डॉ. राजेश बघेल, श्री कसारे, डॉ. ए के शर्मा, सुदर्शन एवं पीआईबी के एडीजी पानतोड़े, सुनील कुमारी तिवारी एवं डॉ.विजय कुमार मौजूद थे।

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