इन दिनों निर्भया के बलात्कारियों की बढ़ रही फाँसी की सजा के दिनों को लेकर देश भर में चर्चा है। कानून में अपराधियों की सजा में देर होने के लिए कई प्रावधान मौजूद है। इन्ही प्रावधानों के माध्यम से अपराधी अपनी सजा में देरी का फायदा उठाने लगता है। देश भर में कई ऐसे मामले हैं जिसमें इसी तरह के प्रावधानों का उपयोग कर सजा में देरी करने का खेल जारी है। आम लोग कानून के इन प्रावधानों का फायदा उठाने को लेकर नाराज़ हैं।
यह बात हम हैदराबाद में पिछले दिनों हुए रेप और मर्डर के मामले में देख चुके हैं। हैदराबाद के सभी आरोपियों को जब हैदराबाद पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया तब वहां के लोग पुलिस की इस कार्यवाही का स्वागत करते दिखे पुलिस की सराहना करते दिखे यानि लोग चाहते हैं कि सज़ा तुरंत मिले। जनता जानती है कि कानून के प्रावधानों को हथियार बनाकर ऐसे अपराधी या तो सजा से बच जायेंगे या फिर सजा को कम करवा लेंगे या फिर सजा में देरी करवा सकते हैं।
लोगों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट हो जाता है कि जनता ऐसे कानूनी प्रावधानों के विरोध में है। किसी वकील का यह कहना कि बलात्कारियों को माफ कर दिया जाय और सोनिया गांधी का उदाहरण देकर यह कहना कि निर्भया की मां उनका अनुसरण करे। यह बेहद ही शर्मनाक है। दोनो ही मामलों में बड़ा फर्क है यह फर्क शायद इन वकील साहिबा को नज़र भी नहीं आ रहा है। जिस माँ ने घटना के बाद से अपना सारा समय अपनी बेटी के बलात्कारियों और हत्यारों को सजा दिलाने में लगाया है उसे यह वकील साहिबा आज कह रही है कि अपराधियों को माफ कर दिया जाय।
घटना 2012 की है तब से अब तक 7 वर्ष हो गए हैं एक आरोपी नाबालिग होने की वजह से आज मौत से बच चुका है। अब चार अपराधी फाँसी की सजा का इंतजार कर रहें हैं। इंदिरा जयसिंघ इन्हें ही माफ कर देने की बात कह रहीं है। आखिर एक वकील ऐसा क्यों कह रही है? यह भी एक सवाल है। ऐसा कहने के पीछे का कारण समझने की जरूरत है। क्या उनकी मानसिकता ऐसी है कि किसी जंघन्य अपराधी को वे माफ कर दें? यदि ऐसा है तो उन्होंने भी कई मामले लड़े होंगे जिसमें कोर्ट ने कुछ को अपराधी ठहराया होगा और कुछ पिड़ित भी रहे होंगे।
क्या उन्होंने अपने ऐसे मुवक्किलों को भी उनके अपराधियों को माफ करने कहा है? एक लड़की जिसके साथ ऐसी जंघन्यता की गई है जिसे बताया भी नहीं जा सकता जिसने लगभग एक माह तक मौत से जूझा हो और इस दौरान अपने अपराधियों को सजा दिलाने की बात कही हो उस लड़की मानसिकता को समझा जा सकता है वह कितनी पीड़ा में रही है। ऐसे में पिड़िता की माँ से उनके अपराधियों को माफ करने की अपील भी करना सही नहीं कहा जा सकता।

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