आखिरकार अपनी स्वतंत्रता का भरपूर उपयोग करते हुए भारतीय वायु सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर बालाकोट में जैश के आतंकी ट्रेनिंग सेंटर और कंट्रोल कमांड अल्फा 3 में जबरदस्त हवाई हमला कर कई दर्जन आतंकियों, कमांडरों और ट्रेनर को मार गिराया। निश्चित रूप से देश की सेना एक बड़ा काम किया है। यदि इतिहास देखें तो आतंकियों पर कार्यवाही के लिए किसी देश की सीमा लांघ कर हवाई हमले करना एक बड़ी चुनौती है जब विश्व में ऐसे हथियार आ गए हैं जो मिनटों के भीतर ही ऐसे अतिक्रमण करने वाले विमान को नष्ट कर सकते हैं। भारतीय वायुसेना विश्व की चौथी सबसे काबिल सेना मानी जाती है। जहांतक मिराज विमानों का सवाल है यह उसके लिए यह सबसे सफल कार्यवाही में से एक मानी जाएगी। कारगिल युद्ध के दौरान दो मिराज विमानों को पाकिस्तान ने मार गिराया था। पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों इस बात जिक्र करते रहे कि आतंकियों ने एक बड़ी गलती की है और इसकी बड़ी कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ेगी। किसी भी प्रधानमंत्री का ऐसा बयान हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने निश्चित रूप से अपने बयान के अनुरूप ही कार्य किया है। पुलवामा हमले पर कई सवाल उठाए गए, सवाल उठाना गलत नहीं है। लेकिन कार्यवाही को लेकर भी विपक्षी पार्टियों का यह कहना कि भारत कार्यवाही क्यों नहीं करता यह नासमझी भरा और राजनीति से प्रेरित है। कार्यवाही करने के पहले तैयारियां की जाती है जो सफलता के लिए जरूरी है। आखिरकार तैयारियों के बाद घटना के 13वें दिन भारतीय वायुसेना ने आतंकियों की 13वीं कर दी है। किसी भी देश के प्रधानमंत्री का बयान बेहद महत्वपूर्ण होता है। उसके एक बयान के बाद शासन तंत्र उसके अनुरूप कार्य करने लगता है। विपक्ष को भारत में प्रधानमंत्री मोदी के बयान को समझना चाहिए था। वायुसेना के इस हमले के बाद पाकिस्तान इस पर क्या प्रतिक्रिया करता है इसे देखते हुए सेना पूरी तरह से तैयार है। इस हमले के पहले बालाकोट सहित पाकिस्तान में मौजूद सभी आतंकी ठिकानों को डोजियर में शामिल कर पाकिस्तान को दे दिया गया था लेकिन पाकिस्तान को कोई कार्यवाही नहीं की ऐसे में भारत इस कार्यवाही को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया है। मनीष शर्मा …

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