कर्नाटक के बेंगलुरू में मानवता शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां कोरोना के लक्षणों वाले एक मरीज की इलाज न मिलने की वजह से मौत हो गई। मरीज को शहर के 18 अस्पतालों में ले जाया गया था लेकिन सभी अस्पतालों ने बेड और आइसीयू उपलब्ध न होने की बात कहते हुए मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया था। मरीज की उम्र 50 साल की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नागरथपेट में मृतक रहता था उसे सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। यह लक्षण सामने आने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन अस्पतालों से वापस लौटाने पर उसकी मौत हो गई।

मृतक के भतीजे के अनुसार उसके चाचा की हालत बिगड़ गई थी और उन्हें कोरोना के लक्षण नजर आ रहे थे। इसके बाद परिवार के लोगों ने एंबुलेंस बुक की और शहर के कई प्राइवेट अस्पतालों और सरकारी अस्पताल में उन्हें लेकर गए लेकिन किसी ने भी चाचा को भर्ती नहीं किया।

‘चाचा को सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। हम उन्हें कई अस्पतालों में ले गए लेकिन सभी ने उनके अस्पतालों में एक भी बेड न होने की बात कही और लौटा दिया था। वहीं सरकार द्वारा चलाया जा रहा Bowring hospital कोरोना रिपोर्ट चाहता था लेकिन शनिवार की शाम होने की वजह से हम रिपोर्ट नहीं ला सके।’

परिजनों की माने तो चाचा की खराब हालत को देखने के बावजूद अस्पताल अथॉरिटी ने कहा कि अगर उनके चाचा का वह टेस्ट लेते हैं और उनकी हालत गंभीर हो जाती है तो उनके अस्पताल में उन्हें भर्ती करने के लिए ICU उपलब्ध नहीं है।

परिवार का आरोप है कि अपोलो, फोर्टिस, मनीपाल और कई अन्य प्राइवेट अस्पतालों ने भी बे़ड और आइसीयू की कमी का हवाला देकर मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया था।

मृतक के भतीजे की माने तो परिवार 50 अस्पतालों में इलाज के लिए भटका, इसमें से 18 अस्पतालों में तो मरीज को लेकर गए लेकिन सभी ने बेड न होने का कारण बताते हुए मरीज को भर्ती करने से इन्कार कर दिया।

जैसे तैसे परिजन मरीज को घर लेकर गए और ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था कर घर में ही इलाज शुरू किया। परिवार ने प्राइवेट हॉस्पिटल की लेबोरेटरी में कोरोना टेस्ट भी कराया। इसकी रिपोर्ट सोमवार को देने के लिए कहा गया था। लेकिन इसके पहले ही मरीज की हालत बिगड़ गई, परिवार ने एक बार फिर अस्पतालों के चक्कर लगाए लेकिन इस बार भी उन्हें किसी भी अस्पताल से मदद नहीं मिली।

आखिर में सरकारी Bowring Hospital ने उन्हें बेहद खराब हालत में भर्ती किया। मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट देने के 10 मिनट के बाद ही मौत हो गई।

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