राफेल डील वाली कमिटी के 3 मेंबर्स ने उठाए थे बेंचमार्क कॉस्ट पर सवाल
राफेल डील वाली कमिटी के 3 मेंबर्स ने उठाए थे बेंचमार्क कॉस्ट पर सवाल

नई दिल्ली : फ्रांस से राफेल फाइटर जेट्स खरीदने की 7.87 अरब डॉलर की डील को नेगोशिएटिंग कमिटी ने बहुमत के निर्णय के साथ पास किया था। सदस्यों ने प्राइसिंग, भारत की जरूरतों के मुताबिक किए जाने वाले अपग्रेडेशन की लागत और इस डील के लिए एकमात्र कॉम्पिटीटर कंपनी की ओर से दिए जा रहे डिस्काउंट पर विचार नहीं करने को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन कमिटी में बहुमत की राय इस नतीजे पर पहुंची कि प्रस्तावित सौदे की शर्तें वाजिब हैं।
कमिटी के भीतर इस बात पर गहन चर्चा हुई थी कि इस डील में प्राइस रक्षा मंत्रालय के 5.2 अरब डॉलर के अनुमान या बेंचमार्क से काफी ज्यादा है। यह माना गया कि यह बेंचमार्क काफी कम है और यूपीए शासन में 126 विमानों के लिए बिडिंग से तय की गई प्राइस के आधार पर नई लागत तय की जाएगी। ऐसा करने पर कमिटी ने ऑरिजिनल बेंचमार्क प्राइस बढ़ाकर 8.2 अरब डॉलर कर दिया। इस पैमाने पर 36 राफेल विमानों के लिए तय की गई कीमत सस्ती पाई गई।
कई सूत्रों ने बताया कि फ्रांसीसी पक्ष से सीधे मोलतोल करने वाली इस कमिटी के 7 में से 3 सदस्यों ने भी ऐसी टिप्पणियां की थीं, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट के बारे में करीब एक दर्जन मसले उठाए गए थे। हालांकि उन पर बहुमत की राय भारी पड़ी। बहुमत की राय पर फिर डिफेंस एच्जििशन काउंसिल ने मंजूरी दी और बाद में उसे सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी के पास भेजा गया।
36 राफेल विमानों की खरीद के मामले में बेंचमार्क कॉस्ट शुरू में 5.2 अरब डॉलर तय की गई थी, जब 2015-16 में इस पर बातचीत शुरू हुई थी। बाद में 7 सदस्यों वाली कमिटी ने बेंचमार्क प्राइस तय करने का नया फॉर्मूला पेश कर दिया। कमिटी के काम से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि 5.2 अरब डॉलर का आंकड़ा ‘उचित’ नहीं था। नए फॉर्मूले में गणना उस ऑफर का उपयोग करते हुए की गई, जो दैसॉ ने पुराने कॉन्ट्रैक्ट के लिए दिया था और यह भी देखा गया कि 126 विमान खरीदने में इसके चलते कितनी लागत आती।

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