बिलासपुर। Bilaspur News: शासन द्वारा हर वर्ष धान खरीदी के लिए नये-नये नियम लागू कर किसानों को लाभन्वित किया जा रहा है, मगर दूसरी ओर समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने वाली समितियों की समस्याओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। यहां सालों बाद भी उन्हें प्रासंगिक व्यय के रूप में 9 रुपये व प्रबंधकीय कार्य के लिए 3 रूपये का भुगतान किया जाता है। ऐसे में उन्हें आर्थिंक संकट से जूझ कर किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करना पड़ रहा है।

राज्य शासन पंजीकृत किसानों से उनकी उपज को समर्थन मूल्य पर सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खरीदी कर रही है। उपार्जन केंद्र पहुंचे धान की व्यवस्था की सारी जिम्मेदार समिति प्रबंधकों पर होती है। हालांकि हर साल शासन द्वारा किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए समर्थन मूल्य की कीमतों में इजाफा भी किया जा रहा है, मगर दूसरी ओर जहां किसानों की उपज की खरीदी की जाती है, वहां कार्यरत समिति प्रभारियों सहित कर्मचारियों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।

शासन द्वारा मंडियों में दो किस्म की राशि प्रदान की जाती है, जिसमें प्रासंगिक एवं सुरक्षा व्यय शामिल है। प्रासंगिक व्यय द्वारा केंद्रों में धान बोरे की सिलाई, तौलाई, हमालों की मजदूरी और धान बोरे की लाट लगाना शामिल है। इसी तरह सुरक्षा व्यय अंतर्गत धान की लाटों को सुरक्षा करने कर्मचारियों को मजदूरी एवं धान की लाट में तिरपाल ढंककर व ड्रेनेज सिस्टम बनाकर धान को बारिश से बचाना रहता है। ऐसे में सभी समितियों को प्रतिवर्ष दोनों प्रकार की राशि मुहैया कराई जाती है, मगर पिछले कई वर्षों से इस राशि में इजाफा नहीं किया जा सका है।

यहां अब भी केवल उन्हें प्रासंगिक व्यय के रूपय में 9 रूपये व प्रबंधकीय कार्यों के लिए 3 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाता है, मगर प्रत्येक सामानों की लागत मूल्य दो से ढाई गुनी हो चुकी है, बावजूद इसके शासन द्वारा प्रासंगिक व प्रबंधकीय व्यय को नहीं बढ़ाया जा रहा है।

इसके चलते उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। इस संबंध में कई समिति प्रभारियों का कहना है कि हर साल बाजारों में सुतली से लेकर कांटा तार सहित अन्य सामानों की किमतें दो से ढाई गुनी बढ़ चुकी है।

इस संबंध में लगातार प्रशासन को अवगत कराते हुए प्रासंगिक व्यय व प्रबंकीय व्यय को बढ़ाए जाने की मांग की जाती रही है, बावजूद इसके स्थिति जस की तस है। यहां लगभग 6-7 सालों में उन्हें नाम मात्र का मूल्य दिया जाता है। जिसके चलते उन्हें आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।

व्यय राशि को लेकर नाराजगी

विभाग द्वारा समितियों को प्रति क्विंटल धान के पीछे प्रासंगिक व्यय और प्रबंधकीय व्यय के नाम पर 12 रुपए दिया जाता है। जबकि समिति प्रबंधकों का मानना है कि विभाग द्वारा दी गई राशि समिति के लिए पर्याप्त नहीं होती। प्रति क्विंटल में खरीदी से लेकर मिलों में पहुंचाने तक लगभग 17 से 20 रुपए का खर्च आता है। वहीं अतिरिक्त खर्च समिति द्वारा वहन किया जाता है। ऐसे में विभाग द्वारा दी गई राशि समितियों के लिए अपर्याप्त है।

हर साल हो रहा नुकसान

समिति प्रभारियों का कहना है कि राज्य शासन केंद्र द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) एवं मापदंड के आधार पर धान उपार्जन केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में काम करती है। राज्य सरकार द्वारा समितियों को धान उपार्जन के लिए 9 रुपए प्रति क्विंटल,प्रासंगिक व्यय व 3 रुपए प्रति क्विंटल प्रबंधकीय व्यय के रूप में भुगतान कर रही है।

प्रासंगिक व्यय के नाम पर दी जा रही राशि में केंद्रों में मजदूरी भुगतान, जिसमें से राज्य शासन पर प्रति क्विंटल अतिरिक्त भार आता है। उक्त व्यय समिति को 17 से 18 रुपए न्यूनतम भुगतान करना पड़ रहा है। इस तरह प्रति क्विंटल 8 से 9 रुपए अतिरिक्त व्यय उन्हें खरीदी से प्राप्त कमीशन में से करना पड़ता है।

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