वाशिंगटन। अमेरिका और चीन के बीच बिगड़ते संबंध के समय में Covid-19 वैक्सीन को लेकर अच्छे नतीजों पर पहुंच रही टेक्सास विश्वविद्यालय से एफबीआई ने संपर्क किया है। आरोप है कि ह्यूस्टन में चीनी वाणिज्य दूतावास ने इस तरह का शोध प्राप्त करने की मांग की थी। यह खबर साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में दी गई है। अमेरिका ने हाल ही में चीन को जासूसी के आरोपों को लेकर ह्यूस्टन में अपने महावाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया था।

चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका को चेंगदू में अपने महावाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दे दिया। रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सास विश्वविद्यालय ने सोमवार को एक ई-मेल में संकाय और अनुसंधान कर्मचारियों को बताया कि उसे एफबीआई द्वारा पिछले सप्ताह जांच के बारे में सूचित किया गया था। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने ई-मेल के हवाले से लिखा- एफबीआई एजेंट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं से वाणिज्य दूतावास की कथित भूमिका और “कोरोना वायरस वैक्सीन शोध” सहित अमेरिकी विश्वविद्यालयों से अवैध रूप से शोध हासिल करने के लिए चीनी सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की कथित भूमिका के बारे में संपर्क करेंगे।

ई-मेल में लिखा गया है कि हम आपको एक निरंतर और बदलती राष्ट्रीय स्थिति से अवगत कराना चाहते हैं, जो हमारे शोध समुदाय के कुछ सदस्यों को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले हफ्ते चीन को टेक्सास के ह्यूस्टन में स्थित अपने वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया था। अमेरिका ने यह आरोप लगाया था कि चीनी दूतावास वर्षों से बड़े पैमाने पर अवैध जासूसी और चीनी प्रभाव स्थापित करने में लगा हुआ है।

हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर विवाद हुआ है। हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने के चीन के कदम, झिंजियांग में मानवाधिकारों के उल्लंघन और दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय आक्रमण की अमेरिका ने भयंकर आलोचना की है। हाल ही में टेक्सास के कांग्रेसी माइकल मैककॉल ने आरोप लगाया था कि ह्यूस्टन में स्थित चीन का महावाणिज्य दूतावास जैव-चिकित्सा अनुसंधान चोरी करने के मामले में बीजिंग की जासूसी का केंद्र है।

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