रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बढ़ते संक्रमण के मामलों ने हमें सामाजिक संक्रमण की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है। दरअसल गाइड लाइन के अनुसार मरीज कहां से संक्रमित हुए हैं, यह जानकारी नहीं होती है तो यह सामाजिक संक्रमण के दायरे में आता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में मिले 9,385 संक्रमितों में से पांच से छह फीसद और राजधानी के कुल 3028 मरीजों में से 15 फीसद कहां से संक्रमित हुए, इसकी जानकारी ही नहीं मिल पाई है। बिना हिस्ट्री और कांटेक्ट वाले मरीजों के दिन-ब-दिन बढ़ते आंकड़ों से स्वास्थ्य विभाग भी सकते में है।

इधर अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने लक्षण रहित मरीजों को घर में ही इलाज की अनुमति के लिए निर्देश जारी किया है। गाइड लाइन के तहत अनुमति देने से पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम संबंधित मरीज के घर का निरीक्षण करेगी। होम आइसोलेशन में मरीज का घर 3 बीएचके होने, हवादार कमरा और अलग शौचालय की सुविधा होने पर ही उन्हें इलाज की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। इलाज निजी अस्पताल द्वारा अनुबंध के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी पूरी जानकारी अस्पताल और मरीज को स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करानी होगी।

55 में से 26 मौत अकेले राजधानी में

बता दें कि राजधानी में 3028 संक्रमितों में 1,164 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज किया गया है। वहीं 1,338 संक्रमित मरीजों का इलाज चल रहा है। प्रदेश में कोरोना से अब तक 55 मौतें हुई हैं। इसमें से 26 मौतें राजधानी में हुई हैं।

प्रदेश में पिछले पांच दिनों में संक्रमण की स्थिति

जुलाई -राज्य – राजधानी

27 – 362 – 179

28 – 306 – 158

29 – 314 – 135

30 – 256 – 104

31 – 336 – 184

राजधानी में अभी कुल संक्रमितों में 15 फीसद ऐसे केस हैं, जिनके कांटेक्ट या ट्रैवल हिस्ट्री का पता ही नहीं चला है। सामाजिक संक्रमण के दायरे में अभी हम नहीं हैं। लेकिन यही स्थिति बनीं रही तो इस दायरे तक जल्द पहुंच सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग कोरोना रोकथाम में बेहतर भूमिका निभा रहा।

किसी भी शहर या राज्य में कुल संक्रमितों में 20 फीसद या इससे अधकि ऐसे मरीज, जो कहां से संक्रमित हुए हैं यह जानकारी ही नहीं मिलती है। ऐसे स्थिति को हम सामाजिक संक्रमण मान सकते हैं। प्रदेश में पांच से छह फीसद ही ऐसे मरीज हैं, जिनके संक्रमण की हिस्ट्री के बारे में पता नहीं चला है।

प्रदेश में संक्रमित मरजों के लिए इलाज की बेहतर व्यवस्था की गई है। सैम्पल जांच का दायरा बढ़ाने की वजह से मरीजों की जल्द पहचान और उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध हो रहा है। कुछ को छोड़ दें तो जो भी मरीज मिले रहे हैं, सभी के संक्रमण की स्थिति का की जानकारी मिल जा रही है। ऐसे में अभी सामाजिक संक्रमण जैसी स्थिति नहीं है।

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