ग्वालियर  । कोरोना से मरने वाले 9 लोगों की मौत सरकारी खाते में दर्ज नहीं हुई है, क्योंकि इनकी आखिरी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। जबकि एक मौत को रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी पॉजिटिव माना गया है। इस मृतक के लिए पूर्व विधायक की सिफारिश आने के बाद रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। बाकी लोगों ने कोई एप्रोच नहीं लगवाई, इसलिए यह गुमनाम मौत बनकर रह गई हैं।

जेएएच के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। यह सभी कोरोना पॉजिटिव होने के कारण भर्ती किए गए थे। इनकी दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आने के कारण सरकारी खातों में इनको कोरोना से मौत नहीं माना गया है। जबकि मुरार निवासी दिलीप गोयल की मौत को सरकारी रिकॉर्ड में कोरोना से मौत के रूप में दर्ज कर लिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि कोरोना से मौत के लिए भी नेताओं की सिफारिश जरूरी हो गई है। दिलीप गोयल के निधन के बाद जब प्रशासन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था कि तभी पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल ने आपत्ति दर्ज करा दी थी।

पूर्व विधायक का कहना था कि जब मृतक को निगेटिव माना जा रहा है तो शव परिजनों को सौंपा जाए। जिससे वह अपने धार्मिक रिती-रिवाज के हिसाब से दाह संस्कार कर सकेंगे। जेएएच प्रबंधन किसी भी सूरत में मरीज को पॉजिटिव मानने को तैयार नहीं था। प्रशासन भी मृतक का अंतिम संस्कार विद्युत शवदाह गृह में कराने पर अड़ा हुआ था। ऐसे में मृतक को कोरोना पॉजिटिव के रूप में रिकॉर्ड में दर्ज करना पड़ा था। अन्य 9 लोगों के पास कोई राजनीतिक सिफारिश नहीं थी, उनके लिए कोई किसी का फोन भी नहीं आया था। इसी वजह से यह मौतें रहस्य बनकर रह गई हैं।

पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल का कहना था कि दिलीप की रिपोर्ट निगेटिव है तो परिजनों को शव सौंपा जाए। जेएएच वाले इसे निगेटिव बता रहे थे। वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद मौत को कोरोना पॉजिटिव के रूप में दर्ज किया गया था।

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