उत्तराखंड वन विभाग द्वारा देश का पहला ग्रीन रामायण पार्क विकसित किया है, इसमें वाल्मिकी रामायण में जिक्र किए गए पौधें हैं और भगवान राम से जुड़े 6 मुख्य जंगलों के प्रकार हैं जो अब विकसित हो चुके हैं। उत्तराखंड के चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (रिसर्च विंग) संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि ग्रीन रामायण पार्क, जिसे हल्वानी इलाके के Kumaon में विकसित करने में 6 महीने से ज्यादा का वक्त लगा है, यह पहला अपने प्रकार का थीम प्रोजेक्ट है जिसमें रामायण को थोड़ा सा एक्सप्लोर किया गया है। खासतौर पर उस परिप्रेक्ष्य में जिसमें भगवान राम द्वारा भारत के चार प्रकार के मुख्य जंगलों में यात्रा की गई थी। दो अन्य जंगलों के प्रकार माता सीता और हनुमान से जुड़े हैं।

चतुर्वेदी आगे कहते हैं ‘हमनें भगवान राम से जुड़ी पौधे की प्रजातियों को खोजने के लिए उपलब्ध साहित्य और धार्मिक पुस्तकों को अध्यन किया। और हम यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि वाल्मिकी रामायण इस तरह की जानकारी के लिए एक खजाना है। हमने 139 प्रजातियों को पाया जिनका महाकाव्य में जिक्र था। इसके बाद हमने इन पौधों पर रिसर्च शुरू किया और पाया कि इनमें से 90 प्रतिशत प्रजातियां अब भी जंगल में मौजूद हैं जिनका जंगलों में जिक्र किया गया था। इसके बाद हमने इनके साइंटिफिक नामों को निकाला और राम वन गमन के दौरान जिन 6 जंगलों में से भगवान राम माता सीता और हनुमान जी के साथ गुजरे थे वहां से 30 रिप्रेजेंटेटिव प्लांट को लिया गया।

उन्होंने आगे बताया कि ‘भगवान राम की अयोध्या से श्रीलंका की यात्रा के दौरान वे भारतीय उपमहाद्वीप में चार प्रकार के जंगलों से गुजरे थे। इसमें चित्रकूट, दंडकारण्य, पंचवटी और किष्किंधा थे। अशोक वाटिका माता सीता और द्रोणगिरी भगवान हनुमान से ताल्लुक रखते हैं।’

लंबे रिसर्च वर्क के बाद हमने तय किया कि ग्रीन रामायण पार्क को हल्वानी बायोडायवर्सिटी पार्क में एक एकड़ जमीन पर विकसित किया जाए। यहां हमने प्लांट्स को लगाया और उनके संस्कृत के नामों का उल्लेख किया जो वाल्मिकी रामायण में बताए गए हैं। इनके साइंटिफिक नाम और पौधे की प्रजातियों से जुड़े श्लोकों को भी पौधों के साथ जिक्र किया गया है।

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