FASTag

सरकार ने साफ किया है कि अवैध और निष्क्रिय फास्टैग (FASTag) वाले वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्गों यानी एनएच के टोल प्लाजा पर दोगुना शुल्क देना पड़ेगा। इससे पहले दोगुना शुल्क सिर्फ उन वाहनों से लिया जाता था, जिनके पास FASTag नहीं होता था और वे FASTag के लिए सुरक्षित लेन में प्रवेश कर जाते थे। नए नियमों के तहत उनसे भी दोगुना शुल्क लिया जाएगा जिनके वाहन में FASTag तो लगा होगा लेकिन वह किसी भी वजह से अवैध या निष्क्रिय होगा। बता दें, इस साल मई आरंभ होने तक देशभर में 3.68 करोड़ FASTag बांटे गए हैं।

सरकार ने एनएच के टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों के लिए पिछले साल 15 दिसंबर से ही FASTag अनिवार्य कर दिया था। हालांकि FASTag की कमी को देखते हुए वाहन चालकों को एक महीने की राहत दी गई थी।

क्यों अवैध या निष्क्रिय हो सकता है FASTag

अधिकांश मामलों में बैलेंस नहीं होने पर FASTag काम नहीं करता है। दरअसल, चालक एक टोल से दूसरे टोल गुजरता रहता है, लेकिन बैलेंस चेक नहीं करता है। जब बैलेंस निर्धारित सीमा से कम हो जात है तो राशि अपने आप नहीं कटती है। हालांकि FASTag सेवा प्रदान करने वाले बैंकों ने एसएमएस सुविधा दी है। यानी हर बार जब आप किसी टोल से गुजरेंगे और आपके खाते से पैसे कटेंगे, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस आएगा जो बैलेंस बताएगा। बैलेंस कम करने पर मोबाइल से बड़ी आसानी से रिचार्ज किया जा सकता है।

वहीं, FASTag बैंड के साथ छेड़छाड़ करने पर कई बार कैमरा पढ़ नहीं पाता है और टोल टैक्स नहीं कट पाता है। अब ऐसे वाहन चालकों को सावधान रहना होगा, अन्यथा दोगुना राशि भरना होगी। बता दें, लॉकडाउन की ढील के बाद सरकार का मानना है कि टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों की संख्या बढ़ेगी। यही कारण है कि इन सीरे से तैयारी शुरू कर दी गई है।

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