जबलपुर । नई फसल आने की खुशी और प्रकृति आराधना का पर्व लोहड़ी शहर में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। लोहड़ी संक्रांति के एक दिन पहले मनाया जाता है। शाम के समय आग जलाई जाती है जिसे लोहड़ी कहते हैं। इस लोहड़ी की पवित्र आग में गुड़, रेवड़ी, गजक, मूंगफली और फुल्ले (पॉपकॉर्न) डालकर आग के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। माना जाता है कि लोहड़ी की आग के चारों ओर घूमने से वैवाहिक जीवन मधुर व मजबूत बनता है। साथ ही ऐसा माना जाता है कि लोहड़ी की आग में सारे दुख-तकलीफ जल जाते हैं और नए जीवन की शुरुआत होती है। इसके अलावा ये त्योहार पंजाब में किसानों का नया वर्ष भी कहलाता है। इसी दिन से ही घरों में नई फसल की पूजा की जाती है।

नए सदस्य के साथ मनाते हैं पर्व : शहर की नम्रता भाटिया ने बताया कि लोहड़ी के दिन परिवार में जो भी सदस्य नया आता है उसके साथ मिलकर लोहड़ी की पूजा करते हैं। जैसे यदि किसी बच्चे का जन्म होता है तो उसके साथ लोहड़ी मनाते हैं। इसके साथ ही यदि परिवार में बहू होती है तो उसके साथ लोहड़ी उत्सव मनाते हैं। यह उत्सव परिवार के साथ समय बिताने के लिए एक अच्छा अवसर है। परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर लोहड़ी की पूजा करते हैं। कंचन धींगरा ने बताया कि उनके यहां शाम को लोहड़ी मनाने की तैयारियां हो रही हैं। सभी लोग नए कपड़े पहनकर, अच्छे से सज-संवर कर लोहड़ी की खुशियां मनाएंगे। भांगड़ा-गिद्दा के संग उत्सव मनाया जाएगा।

प्राकृतिक परिवर्तनों का लेते हैं आनंद : दविंदर सिंह ग्रोवर ने बताया कि जनवरी माह में यानी सर्दियों के अंत में फसलों के बुआई और कटाई का मौसम होता है। मुख्य रूप से त्योहार प्राकृतिक परिवर्तनों का आनंद लेने के लिए मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि लोहड़ी की रात साल की आखिरी सबसे लंबी रात होती है। इसके बाद दिन बड़े होने लगते हैं। इस पर्व को पंजाबी समाज में फसल उत्सव के नाम से भी जाना जाता है।

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