भोपाल । कोरोना संकट के दौर में ऑक्सीजन की कमी और इसके लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता ने सरकार को रणनीति के स्तर पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। प्रदेश में अभी तक ऑक्सीजन प्लांट लगाने को लेकर अलग से कोई नीति नहीं है। उद्योग प्रोत्साहन और निवेश संवर्धन नीति के निवेश प्रस्तावों पर जो सुविधाएं दी जाती हैं, वे ही ऑक्सीजन प्लांट के लिए भी दी जाती है। जिन्हें भी ऑक्सीजन की जरूरत होती है वो निविदा निकालते हैं और आपूर्तिकर्ता से अनुबंध कर लेते हैं।

यही व्यवस्था लगभग सभी राज्यों में लागू है। अब जब इसकी कमी सामने आई है तो सरकार ने इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की रणनीति बनाई है। उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना संक्रमण की वजह से चिकित्सा के क्षेत्र में ऑक्सीजन की मांग कई गुना बढ़ गई है।

इसकी वजह से आपूर्ति प्रभावित हुई है। महाराष्ट्र और गुजरात बड़े आपूर्तिकर्ता राज्य हैं। यहां बंदरगाह होने की वजह से कंपनियों ने ऑक्सीजन के प्लांट लगाए हैं। इन दोनों राज्यों में ऑक्सीजन की खपत भी अधिक है। प्रदेश में आइनॉक्स सहित अन्य कंपनियां काफी समय से ऑक्सीजन की आपूर्ति करती आ रही हैं।

प्रदेश में अभी ऑक्सीजन की खपत प्रतिदिन 120 टन के आसपास पहुंच गई है। जबकि, प्रदेश में उत्पादन 45 टन ही है। खपत की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए सरकार ने 180 टन प्रतिदिन की जरूरत के हिसाब से इंतजाम कर लिया है। केंद्र सरकार के सहयोग से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट से 30 टन प्रतिदिन ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए करार किया है। जरूरत के मुताबिक इसे बढ़ाया जा सकता है

राज्य में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए अलग से प्रोत्साहन देने का उद्योग नीति में प्रविधान नहीं है। निवेश के आधार पर प्रोत्साहन स्वरूप राज्य सरकार जो सुविधाएं देती हैं, वही इस क्षेत्र में भी लागू होते हैं। विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला का कहना है कि नया प्लांट लगाने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा। आइनॉक्स कंपनी ने जमीन के लिए आवेदन किया था।

तीन दिन के भीतर 200 टन क्षमता का प्लांट लगाने के लिए कंपनी को होशंगाबाद के बाबई (मोहासा) में जमीन आवंटित कर दी गई। इसके अलावा अन्य जो भी सहयोग लगेगा, वो दिया जाएगा। ऑक्सीजन के प्रबंधन के लिए हर स्तर पर कदम उठाए गए हैं। आंतरिक उत्पादन बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

प्लांटों की मौजूदा क्षमता में भी वृद्धि करवाई जा रही है। ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए टैंकर के इंतजाम से लेकर अन्य व्यवस्थाएं भी बनाई जा रही हैं।

औद्योगिक संस्थान और अस्पताल स्वयं करते हैं अनुबंध

प्रदेश में औद्योगिक संस्थान हों या फिर अस्पताल, ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए स्वयं अनुबंध करते हैं।जरूरत के मुताबिक वे निविदा बुलाते हैं और प्रस्ताव अनुकूल होने पर अनुबंध करते हैं। इसी व्यवस्था के तहत अस्पतालों ने आइनॉक्स सहित अन्य कंपनियों के साथ अनुबंध किया है। कंपनी महाराष्ट्र स्थित प्लांट से मप्र में प्रतिदिन बीस टन ऑक्सीजन की आपूर्ति करती है। कंपनी के गुजरात सहित अन्य जगह भी प्लांट हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here