जबलपुर । पुलिस प्रशासन के प्रयास से शहर के मुख्य चैराहों पर रेड लाइट देखकर वाहन चालक ठहरने लगे हैं। इन वाहन चालकों को ट्रैफिक सिग्नल के पास लगा टाइमर खराब होने से यह पता नहीं चलता कि ग्रीन लाइट होने में कितनी देर लगेगी इसलिए वह डीजल-पेट्रोल वाहन स्टार्ट रखते हैं। जबकि वाहनों के बेवजह चालू रहने से शहर का प्रदूषण बढ़ रहा है।

इसे लेकर राजेश तिवारी, सुनील पटैल, महेंद्र राय, धीरेश केशरवानी का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते मुख्य सड़कों पर अब सामान्य दिनों जैसी भीड़ नहीं होती। इसके बाद भी ब्लूम चौक, रानीताल, बल्देवबाग, दमोहनाका के ट्रैफिक सिग्नल के पास लगा टाइमर खराब होने से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। जबकि चैराहे का टाइमर चालू होने की दशा में वाहन चालकों को पता रहता है कि उन्हें ग्रीन लाइट मिलने में कितनी देर लगेगी। इसलिए वाहन चालक 20 से 90 सेकंड तक इंतजार करने अपने वाहनों को बंद कर लेते हैं।

अधिकारियों को ध्यान नहीं: उन्होंने बताया कि शहर में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने पुलिस प्रशासन यातायात और अन्य व्यवस्थाएं बनाने में जुटा है। इसलिए पुलिस अधिकारियों को चैराहों के यातायात संकेतकों के खराब उपकरण सुधरवानें या बदलवाने का ध्यान तक नहीं है।

चालान और वसूली पर जोर: यातायात थाना पुलिस वर्तमान में अभियान चलाकर वाहनों का चालान और वसूली करने में जोर-शोर से लगी है। जबकि मुख्य चैराहों के ट्रैफिक सिग्नल खराब होने से नागरिकों को बेवजह डीजल-पेट्रोल जलाना पड़ता है।

ज्यादा नुकसान नहीं: मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक पीएस बुंदेला का कहना है कि शहरवासी अब जागरूकता का परिचय देकर चैराहे में रेड लाइट होने पर अपना वाहन स्वतः बंद कर लेते हैं। किसी चैराहे का टाइमर बंद होने से कुछ देर को वाहन स्टार्ट रहना पर्यावरण को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाता।

पावर प्राब्लम की वजह से चैराहों के टाइमर बंद हो रहे हैं। हेलमेट चेकिंग के दौरान ब्लूम चैक पर बंद टाइमर देखकर तुरंत सुधारने और अन्य चैराहों के टाइमर का जायजा लेकर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

 

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