जबलपुर। असली-नकली बिजली बिल के फेर में इन दिनों बिजली उपभोक्ता फंसे हैं। लॉकडाउन के बाद घर में जब बिल आए तो उनमें खपत इतनी बढ़ गई कि बिल भरने की हिम्मत नहीं हुई। एक ही उपभोक्ता के दो अलग-अलग बिल जारी हो रहे हैं। आर्दश नगर निवासी उपभोक्ता के घर रीडिंग के बाद बिल 2653 रुपये का जारी हुआ। जब ऑनलाइन बिल भरने पहुंचे तो राशि जून का बिल 537 रुपये दिख रहा था। इसके बाद उपभोक्ता बिल के हेरफेर में उलझकर रह गया। अब उपभोक्त बिल जमा करने की बजाय बिजली दफ्तर में असली बिल की पतासाजी में जुटा है।

ऐसे एक-दो मामले नहीं हैं, बल्कि सैकड़ों की संख्या में ये गड़बड़ी हो रही है। अफसरों की माने तो सॉफ्टवेयर बदले की वजह से तकनीकी खामियां मिल रही हैं। इधर कंपनी के आईटी हेड के अनुसार ऑनलाइन बिल पुराने माह के नजर आ रहे हैं, इस वजह से उपभोक्ताओं को भ्रम बना हुआ है। जबकि मौजूदा शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनका बिजली बिल जून माह का ही है जिसमें एकरूपता नहीं है।

सुधार करने में हीलाहवाली

बिजली उपभोक्ता बिलों में गड़बड़ी की शिकायत लेकर दफ्तर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी रीडिंग सुधार का काम करने में कर्मचारी हीलाहवाली कर रहे हैं। नगर संभाग उत्तर और पूर्व क्षेत्र में ऐसे दर्जनों लोगों ने शिकायत दी कि उनके बिल में सुधार कार्य नहीं किया जा रहा है।

नंबर बदले तो शिकायत नहीं कर पा रहे

बिजली उपभोक्ताओं की मार्च माह से आईवीआरएस नंबर बदल गए है। बिजली कंपनी ने कंज्यूमर केयर एंड बिलिंग (सीसीएंडबी) की जगह नेक्स्ट जनरेशन बिलिंग (एनजीबी) सॉफ्टवेयर पर बिल तैयार करवाए जा रहे हैं। हर उपभोक्ता को यूनिक आईवीआरएस नंबर मिलता है जिसकी मदद से उनकी पहचान और ब्यौरा मिलता है। इस नंबर को सॉफ्टवेयर के साथ ही बदल दिया गया है जो बहुत से उपभोक्ताओं को फिलहाल पता ही नहीं है। बिजली शिकायत से लेकर बिल जारी होने के लिए इस नंबर की जरूरत होती है। उपभोक्ता शिकायत करने पहुंचते हैं, लेकिन नया नंबर के बारे में उन्हें पता नहीं रहता है।

भेजा एसएमएस

नए सॉफ्टवेयर में आईवीआरएस नंबर बदला है। इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को मोबाइल पर एसएमएस के जरिए, बिल में भेजी जा रही है। अभी उपभोक्ता पुराने नंबर पर भी बिल हासिल कर सकते हैं। ऑनलाइन बिल अपडेट नहीं हुए होंगे, इस वजह से कई लोगों को इस तरह की शिकायत है।

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