ग्वालियर  हाई कोर्ट की युगल पीठ ने अंचल में की जा रही राजनीतिक सभाओं पर शिकंजा कस दिया है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ पर प्रकरण दर्ज किया जाएगा। केस दर्ज कर कलेक्टर को पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट 23 अक्टूबर को हाई कोर्ट में पेश करनी होगी। साथ ही अब वर्चुअल मीटिंग संभव नहीं होने पर ही भौतिक रूप से सभा हो सकेगी।

इसमें चुनाव आयोग की इजाजत जरूरी होगी। याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति शील नागू व न्यायमूर्ति राजीव कुमार श्रीवास्तव ने की। अधिवक्ता आशीष प्रताप सिंह ने कोविड-19 की गाइड लाइन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जनहित याचिका दायर की है। गत दिवस इस मामले में हाई कोर्ट में बहस हुई थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेश अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पूरा पालन नहीं हुआ है।

याचिकाकर्ता ने जिनके खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया था, उन सभी के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया है। शासन की ओर से पक्ष रखने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित हुए महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव कार्रवाई का विश्वास दिलाया है।

महाधिवक्ता ने कहा कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के खिलाफ कोविड-19 की गाइड लाइन के उल्लंघन के मामले में केस दर्ज किया जाएगा। इस संबंध में ग्वालियर व दतिया कलेक्टर को निर्देशित भी किया जा चुका है। केस दर्ज कर अगली तारीख पर पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश करेंगे। 23 अक्टूबर को याचिका की फिर से सुनवाई होगी। कोर्ट ने प्रिसिंपल रजिस्ट्रार को आदेश की कॉपी ग्वालियर-चंबल संभाग के 8 कलेक्टर व विदिशा कलेक्टर को भेजने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट में सुनवाई के कुछ खास अंश…

अधिकार: कोर्ट ने कहा कि संविधान ने उम्मीदवार व मतदाता दोनों को अधिकार दिए हैं। उम्मीदवार को चुनाव प्रचार का अधिकार हैतो लोगों को जीने के साथ-साथ स्वस्थ रहने का अधिकार दिया है। उम्मीदवार के अधिकार से बड़ा लोगों के स्वस्थ रहने का अधिकार है।

आचरण: कोर्ट ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में राजनेताओं को लोगों के प्रति उदारता दिखानी चाहिए थी, लेकिन उनके आचरण से ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है। स्थिति काफी दुर्भाग्यपूर्ण हैं। न्यायालय के संज्ञान में आया है कि सभाओं में सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन नहीं हो रहा है।

भौतिक सभा को लेकर दिए निर्देश

-राजनीतिक दल को भौतिक सभा करने के लिए इजाजत लेना होगी। जिसमें बताना होगा कि वर्चुअल सभा क्यों नहीं हो सकती है। कलेक्टर संतुष्ट होने के बाद स्पीकिंग आर्डर पास करेंगे और मामला चुनाव आयोग को भेजना होगा। आयोग की इजाजत के बाद ही भौतिक सभा हो सकेगी।

-आयोग से जितने लोगों को सभा में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी, उतने लोगों के मास्क व सेनिटाइजर पर होने वाले खर्च की दोगुनी राशि उम्मीदवार को कलेक्ट्रेट में जमा कराना होगी।

-भौतिक सभा के लिए एक शपथ पत्र देना होगा। सभा में आने वाले हर व्यक्ति को मास्क व सेनेटाइजर उपलब्ध कराए हैं। इजाजत लेने वाला ही उत्तरदायी होगा।

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