नई दिल्ली । कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान दिनेश कार्तिक ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ होने वाले टीम के आठवें लीग में से पहले ही कप्तानी छोड़ दी थी। इसके बाद उनकी जगह टीम की कमान इयोन मोर्गन को थमा दी गई। कहा गया का दिनेश कार्तिक ने अपनी बल्लेबाजी पर फोकस करने के लिए ये कदम उठाया था। वहीं केकेआर के पूर्व कप्तान गौतम गंभीर का मानना है कि ये सारी बातें सच नहीं है।

कप्तान बदलने के पीछे की सच्चाई के बारे में बताते हुए गंभीर ने कहा कि, क्रिकेट संबंधों की बात नहीं है और यहां सिर्फ प्रदर्शन व ईमानदारी देखी जाती है। मुझे नहीं लगता है कि इयोन मोर्गन बहुत कुछ बदल सकते हैं। अगर वो टूर्नामेंट की शुरुआत से भी कप्तानी कर रहे होते तो बहुत कुछ शायद बदल सकता था, लेकिन कोई भी टूर्नामेंट के बीच में कुछ नहीं बदल सकता है। हालांकि कोच और कप्तान के बीच रिश्ता होना अच्छा है।

गंभीर ने कहा कि, मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि वो पिछले ढ़ाई साल से टीम की कप्तानी कर रहे थे और सीजन के बीच में ऐसा नहीं कर सकते। केकेआर खराब स्थिति में नहीं है कि आपको कप्तान बदलने की जरूरत पड़ गई और ये हैरानी की बात है। दो बार टीम के खिताब दिलाने वाले पूर्व कप्तान गंभीर ने कहा कि अगर उन्हें कप्तान बदलना ही था तो उन्हें सीजन की शुरुआत में ही ऐसा करना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि अगर आपको ऐसा लग रहा था कि टीम में वर्ल्ड कप विजेता कप्तान है तो उन्हें सीधे कप्तान दे देनी चाहिए थी, दिनेशा कार्तिक को दवाब में नहीं रखना चाहिए था। कार्तिक को इतना दवाब में रखने की जरूरत क्या थी। गंभीर ने कहा कि ये सुनने में बड़ा अच्छा लगता है कि मैं अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देने के लिए कप्तानी छोड़ रहा हू, लेकिन इसके पीछे सच्चाई ये है कि, आप प्रबंधन से भरना शुरू कर देते हैं कि वो खुश हैं या नहीं जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। सच तो ये है कि मैनेजमेंट उनकी कप्तानी से खुश नहीं थी जिसकी वजह से ऐसा हुआ।

दिनेश कार्तिक ने पिछले 8 मैचों में 14 की औसत से 112 रन बनाए हैं और उनका बेस्ट स्कोर 58 रन रहा है जबकि टीम को पिछेल 8 मैचों में चार में जीत और इतने ही मैचों में हार मिली है। कप्तानी में बदलाव के बाद भी टीम को आठवें मैच में जीत नहीं मिली और मुंबई ने आठ विकेट से हरा दिया।

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